प्रस्तावना

तिब्बत में उपलब्ध प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा साहित्य का मूल संस्कृत में पुनरुद्धार करने के उद्देश्य से शोध विभाग के एक स्वतंत्र कक्ष के रूप में पुनरुद्धार विभाग की स्थापना की गयी । इसका उद्देश्य केवल अनुसंधान के उद्देश्य से संस्कृत में लुप्त पाठों का पुनरुद्धार करना ही नहीं है, बल्कि एक लुप्त भारतीय संस्कृति का उसके मूल रूप में पुनरुज्जीवन करना है । आचार्य नागार्जुन, आर्यदेव, शान्तरक्षित, कमलशील, अतिश आदि के महत्त्वपूर्ण ग्रंथों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गयी है । किसी पाठ का संस्कृत में पुनरुद्धार करने के लिए इस विभाग के अनुसंधानकर्ता भारतीय संस्कृत विशेषज्ञों के सहयोग से कार्य करते हैं । 9वीं शताब्दी से तिब्बत में चलती आयी यह सुविख्यात परम्परा है । किसी भारतीय विशेषज्ञ के साथ काम करना हर तिब्बती अनुवादक के लिए अनिवार्य था । उसी परम्परा को जारी रखते हुए यह विभाग भी संस्कृत भाषा तथा बौद्ध दर्शन दोनों में निष्णात भारतीय विद्वानों के साथ कार्य कर रहा है । आज तक इस विश्वविद्यालय द्वारा पुनरुद्धार, अनुवाद तथा समालोचनात्मक संस्करणों के 60 से भी अधिक शीर्षक प्रकाशित किये हैं । इस विभाग के कुछ ग्रन्थों को उ. प्र. संस्कृत अकादमी से पुरस्कार प्राप्त हैं ।